भोपाल के इन दो IAS की दूसरी रिपोर्ट भी पॉजिटिव, इलाज जारी मध्यप्रदेश में कोरोना पॉजिटिव (COVID-19) मरीजों का ग्राफ तेजी से रोजाना बढ़ता जा रहा है.
April 16, 2020 • Sachin Kumar

भोपाल के इन दो IAS की दूसरी रिपोर्ट भी पॉजिटिव, इलाज जारी

मध्यप्रदेश में कोरोना पॉजिटिव (COVID-19) मरीजों का ग्राफ तेजी से रोजाना बढ़ता जा रहा है.

 भोपाल. मध्यप्रदेश में कोरोना पॉजिटिव (COVID-19) मरीजों का ग्राफ तेजी से रोजाना बढ़ता जा रहा है. राज्य के अब तक 26 जिले करोना संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं. कोरोना के बढ़ते मरीजों की संख्या में दिनों दिन इजाफा देख स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन परेशान और चिंतित हैं. मध्य प्रदेश में पॉजिटिव मामलों की संख्या जहां हज़ार के पार हो चली है. तो वहीं मौत का आंकड़ा भी 5 दर्जन से ज्यादा बढ़ चुका है.

स्वास्थ्य विभाग में फैला संक्रमण

भोपाल में कोरोना वायरस के संक्रमण स्वास्थ्य विभाग तक फैल गया है. आंकड़ों पर गौर करें तो 165 के पार शहर के कोरोना के पॉजिटिव मरीज हैं जिनमें लगभग 95 पॉजिटिव मरीज स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर्मचारी हैं.

 3 अप्रैल को हेल्थ कॉर्पोरेशन के एमडी जे विजयकुमार की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई. सर्दी खांसी के लक्षण दिखने के बाद 31 मार्च से ही आइसोलेटेड रहे और 4 अप्रैल को प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट हो गए. 4 अप्रैल को हेल्थ पीएस पल्लवी जैन गोयल की रिपोर्ट पॉजिटिव आई. इनके साथ स्वास्थ्य के और भी दो अधिकारियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई. रिपोर्ट पॉजिटिव आने के पहले पल्लवी जैन ने कई स्वास्थ्य की समीक्षा बैठकों में भाग लिया. 

ये माना जा रहा है कि पल्लवी जैन और जे विजयकुमार दोनों ही आईएएस, कोरोना कैरियर की तरह काम करते गए और पूरे स्वास्थ्य विभाग को कोरोना संक्रमित बना दिया.​

दूसरी रिपोर्ट भी पॉजिटिव 

सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग में कोरोना संक्रमण का शिकार पाए गए हेल्थ कार्पोरेशन के एमडी जे विजय कुमार और स्वास्थ्य विभाग​ की पूर्व प्रमुख सचिव पल्लवी जैन गोविल की 14 दिन बीतने के बाद दोबारा जांच कराई गई. दोनों अधिकारी एक निजी हॉस्पीटल में एडमिट हैं. एम्स भोपाल से आई रिपोर्ट में दोनों की रिपोर्ट पाजिटिव आई है. 

बताया जा रहा है की रिपोर्ट सोमवार को ही आ गई थी. दोबारा रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर दोनों अधिकारियों को फिलहाल अस्पताल से छुट्टी नहीं मिलेगी. पूर्ण रूप से स्वस्थ्य होने के बाद ही दोनों अधिकारी अस्पताल से डिस्चार्ज हो सकेंगे यानी जब तक टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव नहीं आती अधिकारियों का इलाज अस्पताल में जारी रहेगा.