मध्यप्रदेश: कोरोना से ठीक हुए दो डॉक्टर दान करेंगे अपना प्लाज्मा
April 27, 2020 • Sachin Kumar

मध्यप्रदेश: कोरोना से ठीक हुए दो डॉक्टर दान करेंगे अपना प्लाज्मा


मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के एक निजी अस्पताल में तीन कोरोनो वायरस रोगियों पर प्लाज्मा थेरेपी का ट्रायल शुरू किया गया है। एक अधिकारी के मुताबिक जिन पर यह ट्रायल किया जाएगा वे सभी मरीज गंभीर हालात में हैं।

श्री अरविंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SAIMS) के चेस्ट रोग विभाग के प्रमुख डॉ रवि डोसी ने कहा, इलाज के बाद कोरोना वायरस बीमारी से ठीक होकर लौटे दो डॉक्टर इन रोगियों को अपना प्लाज्मा (रक्त का एक घटक) दान करेंगे।

बता दें कि मध्यप्रदेश में इंदौर कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट बन कर उभरा है। यहां अब तक कोविड-19 के 1,207 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, इस बीमारी से अब तक यहां 60 मौतें हुई हैं।

डोसी ने कहा, "तीन गंभीर कोविड-19 रोगियों पर प्लाज्मा थेरेपी शुरू की गई है। इन मरीजों में एक महिला भी शामिल है। हम सकारात्मक परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि तीनों मरीजों की उम्र 30 से 60 साल के बीच है। इसके अलावा यह प्रयोग अगले 14 दिनों तक जारी रह सकता है।

उन्होंने कहा कि जिन दो डॉक्टरों ने प्लाज्मा दान किया है, वे SAIMS में इलाज के बाद कोरोना वायरस बीमारी से पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं। इस दौरान अधिकारी ने यह भी बताया कि ये दोनों डॉक्टर SAIMS में काम नहीं करते हैं।

जिन दो डाक्टरों की तरफ से प्लाज्मा डोनेट किया जा रहा है। उनमें से एक 54 साल के डॉ इज़हार मुंशी ने कहा, "जब मुझे प्लाज्मा दान करने के लिए कहा गया, तब मैंने तुरंत हां कह दिया। मेरे दिमाग में केवल एक वाक्य गूंज रहा है - कोरोना हार जाएगा, भारत जीत जाएगा।"

मुंशी ने कहा कि उन्होंने SAIMS से 60 लोगों की एक सूची मिली है, जो कोरोनो वायरस संक्रमण से उबर चुके हैं। इन सभी लोगों से प्लाज्मा दान करने का अनुरोध किया जाएगा।

अपना प्लाज्मा दान करने वाले दूसरे डॉक्टर, 39 वर्षीय लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ इकबाल नबी कुरैशी ने कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में उनका एक छोटा सा योगदान था। बीमारी से उबर चुके कुरैशी ने कहा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ज्यादातर मरीज सही इलाज के बाद संक्रमण से उबर जाते हैं। उन्होंने आगे कहा, "हालांकि, यह एक तेजी से फैलने वाली बीमारी है। इसलिए, इसके खिलाफ सुरक्षा के लिए देखभाल की जानी चाहिए।"