PM इमरान की मौजूदगी में बोला मौलाना- औरतों के छोटे कपड़े पहनने की सजा है कोरोना
April 28, 2020 • Sachin Kumar

PM इमरान की मौजूदगी में बोला मौलाना- औरतों के छोटे कपड़े पहनने की सजा है कोरोना

इस्लामाबाद- कट्टरपंथी उलेमाओं की जिद के बाद पाकिस्तान (Pakistan) में कोरोना संक्रमण (Coronavirus) के मामले बढ़ने के बावजूद मस्जिदें खोल दी गयी हैं।हालांकि पाकिस्तान में इस्लामिक कट्टरपंथियों को सिर्फ इसी से ही चैन नहीं पड़ रहा है,अब उनमें से एक ने औरतों को कोरोना संक्रमण (Covid-19) फैलने के लिए दोषी बता दिया है।पाकिस्तान के मशहूर कट्टरपंथी मौलाना तारीक जमील (Maulana Tariq Jameel) ने दावा किया है कि औरतों के गलत कामों की सजा दुनिया भुगत रही है और कोरोना वायरस उसी का नतीजा है।सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इस दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran khan) भी मौजूद थे।कट्टरपंथी शनिवार को एहसास टेलीथॉन फंडरेजिंग इवेंट की अपनी तक़रीर में कहा कि औरतों के छोटे कपड़े पहहने के चलते मुल्क पर कोरोना वायरस जैसा ख़तरा आया है।उन्होंने कहा कि ये औरतों के बुरे कामों की सजा है जो पूरी कौम को भुगतनी पड़ रही है।बता दें कि जब तारीक जमील ये जहर उगल रहा था उस दौरान इमरान खाना भी इसी प्रोग्राम में लाइव उपस्थित थे।

मैं माफ़ी नहीं मांगता'

जमील ने इस कार्यक्रम में ये भी कहा कि वे खुलकर ये बात कहते आए हैं कि औरतों के छोटे कपड़े पहनने की सजा सबको मिल रही है और कोरोना वायरस भी उनमें से एक है।जमील ने आगे कहा कि कुछ टीवी चैनलों ने झूठी खबर चलाई कि मैं अपने कहे पर माफ़ी मांग चुका हूं।मैं जो कहता हूं उस पर कायम हूं, मैं माफ़ी नहीं मांगता।अगर मेरे मुंह से माफ़ी जैसा कुछ निकला भी तो वो सिर्फ जल्दबाजी में की गई गलती रही होगी।

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने की निंदा

मौलाना जमील के इस बयान की ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ़ पाकिस्तान (HRCP) ने निंदा की है और उनसे माफ़ी मांगने के लिए कहा है।मानवाधिकार आयोग ने एक बयान जारी कर कहा- हम मौलाना तारीक जमील से अपील करते हैं कि वे महिलाओं के खिलाफ की गई इस अभद्र टिप्पणी को जल्द से जल्द वापस ले लें इस तरह की टिप्पणियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता और वो भी जब ये नेशनल टेलीविजन पर लाइव प्रसारित की जाएं। इससे समाज में औरतों के खिलाफ अपराध बढ़ सकते हैं। मानवाधिकार आयोग ने कहा कि टीवी चैनल पर ऐसी बेटें प्रसारित होना और इस पर सवाल तक न खड़ा होना काफी दुख की बात है।